41 फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टरों पर FIR, डेढ़ साल से दबी थी रजिस्ट्रेशन की फाइल

NCISM जांच में सामने आया फर्जी रजिस्ट्रेशन

उत्तर प्रदेश में 41 कथित फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज होने का मामला सामने आया है। NCISM जांच में फर्जी रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आई।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कथित रूप से फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर आयुर्वेदिक चिकित्सा का अभ्यास करने वाले 41 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। यह मामला आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति में फर्जी पंजीकरण से जुड़ा बताया जा रहा है।

मामले के अनुसार, संबंधित दस्तावेजों की जांच में कथित तौर पर ऐसे लोगों के रजिस्ट्रेशन सामने आए, जिन्हें वैध प्रक्रिया के तहत पंजीकृत डॉक्टर नहीं पाया गया। इसके बाद पुलिस स्तर पर कार्रवाई की गई।

> महत्वपूर्ण: FIR दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है। इससे किसी व्यक्ति का अपराध न्यायालय द्वारा सिद्ध होना नहीं माना जाता।

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कैसे सामने आया कथित फर्जी रजिस्ट्रेशन का मामला?


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच के दौरान आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा से संबंधित रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच की गई।

बताया गया है कि अप्रैल 2025 में दिल्ली से आई National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) की टीम ने जांच के दौरान 41 डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन को संदिग्ध/फर्जी पाया।

इसके बाद मामले की फाइल लंबे समय तक संबंधित विभागीय अधिकारियों और पुलिस के बीच प्रक्रिया में रहने की बात सामने आई।

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डेढ़ साल तक कार्रवाई का इंतजार

रिपोर्ट के मुताबिक, NCISM की जांच के बाद भी यह मामला तत्काल FIR तक नहीं पहुंच सका। लगभग डेढ़ साल तक फाइल कार्रवाई की प्रतीक्षा में रही।

इस दौरान कथित रूप से संबंधित लोगों द्वारा प्रैक्टिस किए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

मामले में अब FIR दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा दस्तावेजों, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा सकती है।

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बोर्ड के रजिस्ट्रार की शिकायत पर FIR

उपलब्ध समाचार कटिंग के अनुसार, बोर्ड के रजिस्ट्रार अखिलेश वर्मा की तहरीर के आधार पर हुसैनगंज पुलिस ने मामला दर्ज किया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 23 जिलों से जुड़े 41 कथित फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

यह मामला केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने तक सीमित है या इसमें रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अन्य स्तरों पर भी किसी की भूमिका थी, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।

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किन जिलों के नाम सामने आए?

समाचार कटिंग में उत्तर प्रदेश के कई जिलों से जुड़े लोगों के नाम दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

इनमें लखनऊ, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, संतकबीर नगर, श्रावस्ती, मुरादाबाद, सुल्तानपुर, झांसी, गोंडा, रामपुर, कासगंज, संत रविदास नगर, महाराजगंज, कुशीनगर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, धर्मपाल, सीतापुर, मेरठ, सहारनपुर, अयोध्या और जौनपुर आदि का उल्लेख है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम या पेशेवर दर्जा केवल FIR अथवा मीडिया रिपोर्ट में आने से अंतिम रूप से दोष सिद्ध नहीं होता।

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NCISM की जांच क्यों महत्वपूर्ण है?

National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) भारत में Indian System of Medicine से संबंधित नियामक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आयुर्वेद, यूनानी और अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में डॉक्टर के पंजीकरण और पेशेवर पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड की वैधता बेहद महत्वपूर्ण है।

यदि किसी व्यक्ति द्वारा फर्जी दस्तावेज या गलत रजिस्ट्रेशन के आधार पर चिकित्सा प्रैक्टिस किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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फर्जी रजिस्ट्रेशन से क्या खतरा है?

फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन का मामला केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहता। इससे मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता और वैध रूप से पंजीकृत चिकित्सकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

इसी कारण चिकित्सा पंजीकरण की सत्यता की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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क्या FIR दर्ज होने से आरोप साबित हो जाते हैं?

नहीं।

FIR दर्ज होना पुलिस जांच की शुरुआत है। FIR में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जाती है। इसके बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया होती है।

इसलिए इस मामले में संबंधित 41 व्यक्तियों को “दोषी” कहना उचित नहीं होगा, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा अपराध सिद्ध न हो जाए।

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आयुर्वेदिक डॉक्टर अपना रजिस्ट्रेशन कैसे सत्यापित करें?

चिकित्सकों को अपने पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका नाम संबंधित वैध रजिस्टर में दर्ज हो।

किसी भी चिकित्सा पद्धति में प्रैक्टिस करने से पहले संबंधित नियामक संस्था द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण और प्रैक्टिस संबंधी नियमों का पालन करना आवश्यक है।

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FAQ

Q1. 41 फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टरों का मामला किससे जुड़ा है?

यह मामला कथित फर्जी आयुर्वेदिक/यूनानी चिकित्सा पंजीकरण से जुड़ा बताया गया है, जिसमें 41 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।


Q2. 41 लोगों के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, जांच में उनके रजिस्ट्रेशन को कथित तौर पर फर्जी पाया गया था। इसके बाद संबंधित अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की।


Q3. NCISM क्या है?

NCISM यानी National Commission for Indian System of Medicine, Indian System of Medicine के लिए राष्ट्रीय नियामक संस्था है।


Q4. क्या FIR होने का मतलब डॉक्टर दोषी साबित हो गए?

नहीं। FIR केवल आरोपों की जांच की शुरुआत है। दोष का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाता है।


Q5. क्या यह मामला केवल लखनऊ का है?

समाचार कटिंग के अनुसार, मामला उत्तर प्रदेश के कई जिलों से जुड़े 41 लोगों का बताया गया है और FIR लखनऊ में दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।


Q6. फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन की शिकायत कहां की जा सकती है?

ऐसे मामलों में संबंधित चिकित्सा नियामक संस्था, राज्य बोर्ड/रजिस्ट्रेशन प्राधिकरण और पुलिस के समक्ष शिकायत की जा सकती है।

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 निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में 41 कथित फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टरों के खिलाफ FIR का मामला भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में पंजीकरण की पारदर्शिता और सत्यापन के महत्व को सामने लाता है।

मामले में NCISM की जांच, संबंधित बोर्ड की शिकायत और पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित फर्जी रजिस्ट्रेशन कैसे किए गए और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

HomeopathyNews.in इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट/समाचार कटिंग के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें लगाए गए आरोप संबंधित रिपोर्ट और FIR में वर्णित तथ्यों पर आधारित हैं। FIR दर्ज होना अपराध सिद्ध होने के समान नहीं है। संबंधित व्यक्तियों की दोषसिद्धि या निर्दोषता का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। पाठकों को किसी भी कानूनी, चिकित्सकीय या पेशेवर निर्णय से पहले आधिकारिक दस्तावेज एवं संबंधित नियामक संस्था की जानकारी अवश्य सत्यापित करनी चाहिए।

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