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होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक दवा लिखने की अनुमति, विवाद बढ़ा

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साल के फार्माकोलॉजी सर्टिफिकेट के बाद होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक दवा लिखने की अनुमति के मामले पर विवाद बढ़ा। बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई जारी।

महाराष्ट्र में होम्योपैथी डॉक्टरों को लेकर एक बड़ा और विवादित फैसला सामने आया है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) द्वारा एक वर्ष का फार्माकोलॉजी (Pharmacology) सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक यानी एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति/पंजीकरण दिए जाने का मामला चर्चा में है।

होम्योपैथी डॉक्टरों को लेकर एक बड़ा और विवादित फैसला सामने आया 

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इस फैसले को लेकर मेडिकल संगठनों और होम्योपैथी डॉक्टरों के बीच मतभेद सामने आए हैं। वहीं, मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा पवार नाम की एक होम्योपैथी डॉक्टर ने फार्माकोलॉजी में एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स किया था। इसके बाद उनका पंजीकरण महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में किया गया।

बताया गया है कि यह पंजीकरण उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में होम्योपैथी डॉक्टर MMC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों ने शुरुआत में पंजीकरण प्रक्रिया रोकने का प्रयास किया था, ताकि सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके। हालांकि, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के MMC कार्यालय पहुंचने के बाद अंततः पंजीकरण कर दिया गया।

महाराष्ट्र बना ऐसा करने वाला पहला राज्य?

इस फैसले के बाद महाराष्ट्र को देश का पहला ऐसा राज्य बताया जा रहा है, जहां एक वर्ष का फार्माकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने वाले होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक/एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति या रजिस्ट्रेशन दिए जाने की व्यवस्था सामने आई है।

हालांकि, यह व्यवस्था किस सीमा तक लागू होगी और किन दवाओं को लिखने की अनुमति होगी, यह मामला अभी स्पष्ट कानूनी और नियामकीय जांच के दायरे में है।

IMA और MARD ने जताया विरोध

इस फैसले का विरोध भी तेज हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) सहित डॉक्टर संगठनों ने इस कदम पर आपत्ति जताई है।

विरोध करने वाले डॉक्टरों का तर्क है कि केवल एक वर्ष के फार्माकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा की दवाएं लिखने की अनुमति देना मरीजों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

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डॉक्टरों ने हड़ताल की दी चेतावनी

मामले के विरोध में डॉक्टर संगठनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार से नॉन-इमरजेंसी (Non-Emergency) चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई, जबकि गुरुवार, 5 अगस्त से इस विरोध को आपातकालीन सेवाओं तक बढ़ाने की चेतावनी भी दी गई।

हालांकि, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर किसी भी आंदोलन का अंतिम स्वरूप संबंधित संगठनों के निर्णय पर निर्भर करेगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला लंबित

इस पूरे विवाद की सुनवाई फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही है। अदालत के फैसले की उम्मीद अगस्त के मध्य तक जताई जा रही है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल की ओर से दिया गया यह रजिस्ट्रेशन सशर्त (Conditional) बताया जा रहा है। यानी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है या इसे रद्द भी किया जा सकता है।

होम्योपैथी डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों की अलग-अलग राय

इस फैसले को लेकर दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दवाएं लिखने के लिए केवल फार्माकोलॉजी का एक वर्ष का सर्टिफिकेट पर्याप्त नहीं होना चाहिए और इसके लिए व्यापक आधुनिक चिकित्सा प्रशिक्षण आवश्यक है।

वहीं, होम्योपैथी डॉक्टरों का तर्क है कि अतिरिक्त प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें कम से कम एक निर्धारित और सीमित दायरे में आधुनिक दवाएं लिखने का अधिकार मिलना चाहिए।

वहीँ कुछ क्लासिक होम्योपैथिक डॉक्टर्स होम्योपैथिक को अलग पैथी के रूप मे पूर्ण मान रहे है| वह नहीं चाहते कि होम्योपैथिक को एलोपैथी के साथ जोड़ा जाये| दोनों अलग अलग चिकित्सा पद्द्ति हैँ | दोनों को अलग रहने देना ही बेहतर है.

मरीजों की सुरक्षा पर भी बहस

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष मरीजों की सुरक्षा है। सवाल यह है कि क्या एक वर्ष के अतिरिक्त फार्माकोलॉजी प्रशिक्षण के बाद होम्योपैथी चिकित्सकों को आधुनिक दवाओं के उपयोग की अनुमति देना पर्याप्त प्रशिक्षण माना जा सकता है

दूसरी ओर, होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि यदि सरकार और नियामक संस्था स्पष्ट प्रशिक्षण, परीक्षा और दवाओं की निर्धारित सूची के साथ सीमित अधिकार देती है, तो इससे ग्रामीण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सकीय सुविधा बढ़ सकती है।

अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन है और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा दिया गया पंजीकरण सशर्त बताया गया है। इसलिए जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आता, इस व्यवस्था की स्थायी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।

जानकारी के मुताबिक यह मामला केवल महाराष्ट्र के होम्योपैथी डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। अदालत का फैसला आने के बाद देश के अन्य राज्यों में भी होम्योपैथी डॉक्टरों के अधिकार, अतिरिक्त फार्माकोलॉजी प्रशिक्षण और एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है।

FAQ

Q1. क्या महाराष्ट्र में होम्योपैथी डॉक्टर एलोपैथिक दवा लिख सकते हैं?

फिलहाल मामला कानूनी विवाद और सशर्त पंजीकरण से जुड़ा है। अंतिम स्थिति बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद अधिक स्पष्ट होगी।

Q2. कितने समय का फार्माकोलॉजी कोर्स किया गया है?

रिपोर्ट में एक वर्ष के फार्माकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स का उल्लेख है।

Q3. मामला किस अदालत में चल रहा है?

मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन बताया गया है।

Q4. इस फैसले का विरोध कौन कर रहा है?

रिपोर्ट के अनुसार IMA और MARD सहित डॉक्टर संगठनों ने इसका विरोध किया है।

Q5. क्या यह फैसला पूरे भारत में लागू है?

नहीं। यह मामला महाराष्ट्र में राज्य स्तर पर लिए गए निर्णय/पंजीकरण से संबंधित है और इसे पूरे भा

रत पर लागू नियम नहीं माना जा सकता।

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