कोरोना योद्धाओं को मिला सम्मान, लेकिन आज संघर्ष क्यों?
कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब पूरा देश डर और संकट से गुजर रहा था, तब डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा की।
उस समय देशवासियों ने थाली और ताली बजाकर कोरोना योद्धाओं का सम्मान किया था, लेकिन आज संक्रमण के मामले कम होने के बाद कई कोविड कर्मियों को नौकरी से हटाए जाने की खबरों ने एक नई बहस शुरू कर दी है।
कोविड काल में आयुष डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका
कोरोना महामारी के दौरान आयुष चिकित्सा व्यवस्था ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मध्य प्रदेश नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत आयुष चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने:
- कोविड होम आइसोलेशन मरीजों की निगरानी सुनिश्चित की
- जरूरत पड़ने पर मरीजों को कोविड कमांड सेंटर तक पहुंचाया
- इमरजेंसी स्थिति में एंबुलेंस और अस्पताल व्यवस्था में सहयोग किया
इन कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार के वादे आज भी अधूरे?
कोरोना काल के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोरोना योद्धाओं के लिए कई घोषणाएं की गई थीं।
इनमें:
- अतिरिक्त मानदेय देने की बात
- सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता
- स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष लाभ देने की घोषणा
शामिल थीं।
लेकिन कई कोविड कर्मियों का कहना है कि आज तक उन्हें इन घोषणाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया।
संविदा कर्मचारियों की परेशानी: वर्षों से नहीं बढ़ा वेतन
कोविड काल में काम करने वाले कई संविदा कर्मचारियों का कहना है कि पिछले वर्षों में महंगाई बढ़ने के बावजूद उनके वेतन में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
आयुष चिकित्सकों का उदाहरण देते हुए बताया गया कि कई स्थानों पर उन्हें लगभग ₹32,000 प्रति माह मानदेय दिया जा रहा है, जबकि अन्य चिकित्सा सेवाओं में कार्यरत डॉक्टरों को इससे अधिक वेतन मिल रहा है।
समान कार्य, समान वेतन की मांग
आयुष चिकित्सकों का तर्क है कि चिकित्सा शिक्षा और जिम्मेदारियों के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उनका कहना है कि चिकित्सा शिक्षा में कई विषय समान होते हैं और मरीजों की सेवा में सभी चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर आयुष चिकित्सक लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी उम्मीद
उत्तराखंड में आयुष और एलोपैथिक चिकित्सकों के वेतन समानता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
इस फैसले के बाद आयुष चिकित्सकों को उम्मीद है कि चिकित्सा पद्धति के आधार पर वेतन में अंतर खत्म होगा और समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाएगा।
कोरोना योद्धाओं को चाहिए सम्मान के साथ स्थायी समाधान
जिन स्वास्थ्य कर्मियों ने महामारी के समय देश और समाज की सेवा की, उनके लिए केवल सम्मान नहीं बल्कि रोजगार सुरक्षा और उचित अधिकार भी जरूरी हैं।
कोविड योद्धाओं का कहना है कि सरकार को उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए स्थायी रोजगार और बेहतर सुविधाओं की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
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1 टिप्पणियाँ
इनको sabko मर्ज करना चाहिये किसी को भी नहीं हटाना चाहिए
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