होम्योपैथी को “झोलाछाप” कहना पड़ सकता है भारी! NCH ने जारी किया सख्त सर्कुलर
Published Date: 08 जून 2026
भारत में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को लेकर लगातार होने वाली बहसों के बीच राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है। आयोग के Board of Ethics and Registration for Homoeopathy (BERH) ने स्पष्ट किया है कि पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के खिलाफ अपमानजनक, भ्रामक और आधारहीन बयान देना उचित नहीं है और ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा।
यह सर्कुलर 8 जून 2026 को जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य होम्योपैथी पेशे और पंजीकृत चिकित्सकों की गरिमा एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अनुसार, होम्योपैथी भारत में एक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणाली है। आयोग ने देखा कि कई बार सोशल मीडिया, समाचार माध्यमों, वेबसाइटों, प्रेस विज्ञप्तियों और अन्य सार्वजनिक मंचों पर होम्योपैथी एवं पंजीकृत चिकित्सकों के बारे में भ्रामक या अपमानजनक टिप्पणियां की जाती हैं।
सर्कुलर में कहा गया है कि किसी विधिवत पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक को बिना किसी कानूनी आधार के “झोलाछाप” (Quack) कहना उसकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और यह संबंधित कानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
NCH ने क्या निर्देश दिए हैं?
सर्कुलर में आयोग ने निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए हैं:
1. अपमानजनक शब्दों के प्रयोग से बचें
किसी भी सार्वजनिक संचार, समाचार, सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट कंटेंट, प्रेस रिलीज या सरकारी दस्तावेज में पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने से बचने की सलाह दी गई है।
2. तथ्य आधारित जानकारी ही प्रकाशित करें
होम्योपैथी और उसके चिकित्सकों से संबंधित किसी भी जानकारी को प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करने और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया है।
3. शिकायतों के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएं
यदि किसी चिकित्सक के आचरण को लेकर कोई शिकायत है, तो उसके लिए निर्धारित कानूनी, नियामक या अनुशासनात्मक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पूरे होम्योपैथी पेशे को निशाना बनाकर सामान्यीकृत आरोप लगाने से बचने की सलाह दी गई है।
पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के अधिकार
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 के तहत राष्ट्रीय या राज्य रजिस्टर में दर्ज चिकित्सकों को कानून के अनुसार चिकित्सा अभ्यास करने का अधिकार प्राप्त है।
आयोग ने दोहराया है कि ऐसे चिकित्सकों की गरिमा, पहचान और पेशेवर सम्मान की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए क्या संदेश?
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी तेजी से फैलती है। ऐसे में आयोग ने सभी व्यक्तियों, संस्थानों और संगठनों से अपील की है कि वे होम्योपैथी और उसके चिकित्सकों के संबंध में जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करें तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या मानहानिकारक सामग्री साझा करने से बचें।
होम्योपैथी समुदाय के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सर्कुलर?
यह सर्कुलर देशभर के लाखों होम्योपैथिक चिकित्सकों, छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति और उसके पंजीकृत पेशेवरों के प्रति सम्मानजनक और तथ्यात्मक संवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा जारी यह सर्कुलर होम्योपैथी पेशे की गरिमा और कानूनी मान्यता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। आयोग ने संकेत दिया है कि पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के खिलाफ भ्रामक, अपमानजनक या मानहानिकारक बयानबाजी को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
होम्योपैथी को झोलाछाप कहना पड़ सकता है भारी, NCH ने जारी किया नया सर्कुलर 2026
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) ने 8 जून 2026 को महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी कर पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक बयानों पर चिंता जताई। जानिए क्या हैं नए निर्देश।
NCH Circular 2026
Homeopathy News Hindi
Homoeopathy Practitioner Rights
National Commission for Homoeopathy
होम्योपैथी समाचार
होम्योपैथिक चिकित्सक
NCH Latest Update
Homeopathy Circular
#Homeopathy #NCH #Homoeopathy #HomeopathyNews #AYUSH #HomeopathicDoctor #MedicalNews #HealthcareIndia #BHMS #NationalCommissionForHomoeopathy #HomoeopathyUpdate #AYUSHNews #IndiaHealthcare #HomeopathyIndia #BHMSDoctor #होम्योपैथी #आयुष #होम्योपैथिक_चिकित्सक #स्वास्थ्य_समाचार #NCHCircular2026
> नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सर्कुलर की जानकारी पर आधारित समाचारात्मक प्रस्तुति है। पाठकों को आधिकारिक दस्तावेज़ और संबंधित प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों का अवलोकन अवश्य करना चाहिए।


0 टिप्पणियाँ