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आयुष विभाग में तबादला विवाद: क्या रद्द हो सकते हैं विवादित तबादले? मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) में हाल ही में हुए तबादलों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विभाग के भीतर हुए स्थानांतरणों में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया है और संबंधित जानकारी तलब की है।

आयुष विभाग के तबादलों पर उठे सवाल

आयुष विभाग में हुए तबादलों को लेकर कई कर्मचारियों और अधिकारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप है कि कुछ तबादले निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमोदन के बिना किए गए। यही कारण है कि इन स्थानांतरण आदेशों को लेकर विभाग में असंतोष का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, समूह ‘ख’ श्रेणी के लगभग 15 कर्मियों के तबादलों में कई बार संशोधन किया गया। बार-बार किए गए बदलावों ने पूरे मामले को और अधिक विवादित बना दिया है।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। शनिवार को तबादलों से जुड़ी सभी जानकारियां एकत्र की गईं और पूरे प्रकरण की समीक्षा शुरू की गई।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विवादित तबादलों को रद्द किया जा सकता है।

बिना अनुमोदन हुए तबादलों पर कार्रवाई संभव

खबरों के अनुसार, जिन स्थानांतरणों में सक्षम स्तर से अनुमोदन नहीं लिया गया या प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, उन पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। ऐसे मामलों में स्थानांतरण आदेश निरस्त किए जा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि आयुष विभाग के महानिदेशक (डीजी) द्वारा मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी गई है। इसके बाद शासन स्तर पर इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

आयुष मंत्री भी पहुंचे लखनऊ

तबादला विवाद के बीच आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ भी लखनऊ पहुंचे। माना जा रहा है कि विभाग में उत्पन्न स्थिति और विवादित तबादलों पर उच्चस्तरीय चर्चा की जा सकती है।

कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

तबादला आदेशों को लेकर विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिन कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं, वे अब शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

यदि विवादित आदेशों को निरस्त किया जाता है, तो कई कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि जांच में कोई अनियमितता नहीं मिलती है, तो वर्तमान आदेश यथावत भी रह सकते हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल पूरा मामला शासन की समीक्षा के अधीन है। मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी और विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित तबादले रद्द होंगे या नहीं। आयुष विभाग के हजारों कर्मचारी और अधिकारी अब सरकार के अगले निर्णय पर नजर बनाए हुए हैं।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग में तबादलों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है, जिसका असर आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विभाग के कर्मचारियों पर पड़ेगा।

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